ज़रा सोचिए यदि सड़क दुर्घटना में बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद अस्पताल पहुंचे मरीज को इलाज मिलने की बजाय हालत और बिगड़ जाए तो क्या होगा। मामला 13 जून का है , दरअसल इंदौर के बंगाली चौराहा में स्थित एसएमएस एनर्जी हॉस्पिटल में जब एक 31 वर्षीय युवक कमलेश तंवर जब सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल होने के बाद पहुंचा तो डॉक्टर ने इलाज तो दिया लेकिन बिल्कुल गलत।
जिनकी दवाई, इलाज की जगह ज़हर का काम की। कमलेश ने एनर्जी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर अंशुल मीणा पर आरोप लगाते हुए बताया कि डॉक्टर ने कमलेश के हाथ का ऑपरेशन किया था। जिसमें k wire डाले गए थे। किंतु बिना किसी x ray के k wire को डॉक्टर अंशुल द्वारा निकाल दिया गया। जिससे थोड़ी सी जकेगह में फैल रहा इन्फेक्शन पूरे हाथ में फैल गया। जब कमलेश डॉक्टर के पास पहुंचा तो उन्होंने उसे सरकारी अस्पताल LNCT में शिफ्ट कर दिया। जहां न तो कोई बेड मिला और न ही जरूरत की कोई भी चीज मुहैया करवाई गई।

LNCT के चिकित्सकों का कमलेश से कहना था कि के-वायर गलत तरीके से ओर बिना कोई X- RAY किए निकाले गए हैं। हाथ में फैले इन्फेक्शन की यही मुख्य वजह है। कमलेश की गंभीर हालत देखकर चिकित्सकों ने बिना किसी देरी व रुकावट के उसका दोबारा सही तरीके से ऑपरेशन किया।



कमलेश ने लगाए डॉ मीणा पर आरोप
कमलेश ने आरोप लगाया है कि जब dr. अंशुल से उन्होंने दोबारा बात की तो वे अपनी गलती मानना तो दूर हाई कोर्ट के जजों की धमकी देते नज़र आए।
हालांकि इस संबंध में जब द ईगल मीडिया ने डॉक्टर अंशुल से संपर्क किया तो उनका कहना था कि मरीज रेगुलर नहीं था इसलिए इंफैक्शन को गंभीरता से नहीं देखा जा सका। मरीज का कहना है कि वो हर वक्त जिस वक़्त भी डॉक्टर ने बुलाया मौजूद था।
गौरतलब है कि के-वायर (K-Wire) सर्जरी, जिसे किर्शनेर वायर फिक्सेशन भी कहा जाता है, एक सामान्य ऑर्थोपेडिक प्रक्रिया है। इसका उपयोग टूटी हुई हड्डियों (फ्रैक्चर) को आपस में जोड़कर सही स्थिति में रखने (स्थिर करने) के लिए किया जाता है।
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