जब ऑटो ड्राइवर बना गुरु, एक सफर ने सिखाया जिंदगी का असली मतलब

अपने कार्य को सराहने का एक तरीका यह भी हो सकता है। मूलतः कर्म ही पूजा है और स्वनिर्धारित कर्म ईश्वर। अपने कर्म के प्रति ऑटो वाले भैया की दीवानगी उन्हें हर रोज गाडियों से भरे शहर के बीच ईश्वरीय शक्ति से मिलवाती होगी। जो उनके कर्म में उनको परस्पर सफलता दिलाती होगी। या यूं कहो कि उनकी गाड़ी ही ईश्वर है। सफर कर्म और जिंदगी दीवानगी। ऑटो में बैठते ही जब बगल में नजर पड़ी तो एक अलग ही भावना जागृत हुई।

रोजमर्रा की भागदौड़ से निकला एक अनायास सफर

आज काफी दिनों बाद मैंने रोजमर्रा की जिंदगी से खुद के लिए वक़्त निकालने का मन बनाया। इससे पहले कि मन बदलता या किसी अन्य जरूरी काम से पूरा प्लान रद्द करना पड़े मैंने झटपटा कर ऑटो बुक कर ली। कहां जाना था, क्या करना था। अभी तय नहीं किया था। लेकिन सोचा यदि काम को रोक कर घर से निकल गई तो जाना कहां है अपने – आप ही तय हो जाएगा।

ऑटो ड्राइवर की प्रेरक कहानी, कर्म ही पूजा का संदेश देती एक भावुक हिंदी स्टोरी को
एक ऑटो सफर, एक अनमोल सीख—ऑटो ड्राइवर की बात ने समझाया कि कर्म ही सबसे बड़ी पूजा है।
ऑटो में लिखी एक लाइन जिसने रोक लिया ध्यान

जैसे ही ऑटो में बैठी तो मेरी नज़र बगल में लिखी पंक्तियों पर पड़ी।

“मुझे गाड़ी मत समझना, मैं रोड की रानी हूं। ड्राइवर मेरा आशिक़ है और मैं उसकी दीवानी हूं।”

यह पंक्तियां मात्र पंक्तियां नहीं थीं। यह ऑटो वाले भैया की अपने कार्य के प्रति दीवानगी थी। अपने कार्य को सराहने का एक तरीका था।

अपने काम के प्रति ऑटो ड्राइवर का समर्पण

शायद जब वो बाहर निकलते होंगे, यातायात के दबाव में ऑटो ही उनका सहारा होती होगी। धूप में छाँव बनती होगी। शायद दिन के हर घंटे उन्हें ईश्वरीय शक्ति से मिलवाती होगी। जब उनको खुद की जिंदगी का ही भरोसा नहीं लगता होगा तो ऑटो उनके जीवन और मृत्यु के बीच दीवार बन कर खड़ी होती होगी।

आखिर मैंने कहाँ जाने का निर्णय लिया

यह सारे सवाल मन को विचलित कर गए। कि ऑटो वाले भैया ने आवाज दी…’ मैडम जाना कहां है ‘

मैंने पलट के बोला भैया फिलहाल तो ऑटो में लिखी इन पंक्तियों का जवाब ढूंढने।

भैया रोज़ कैसे मिलते है ईश्वर से

भैया मुस्कुराए और ऊपर ईश्वर की ओर इशारा किया। ‘ दीदी इतना समझ लो कि हमारे लिए ईश्वर है यह ऑटो, और ईश्वर को धन्यवाद अर्पित करने का तरीका यह पंक्ति ‘।

यह भी पढ़ें।

जानिए महिलाओं को छोड़ने वाले को आखिरकार क्यों दिया रेलवे ने दण्डओं

हमें फॉलो करें।

Categories:

Leave a Reply

Discover more from The Eagle Media

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading