समूचे पदेश में TET निरस्तीकरण का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। आज मध्यप्रदेश शिक्षक संघ ने तमाम जिलों में TET निरस्तीकरण के संदर्भ में कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा।
शिक्षकों का मानना था कि उनके वर्षों के अनुभव को कुछ घंटों की परीक्षा के ज़रिए नहीं आंका जा सकता। न इस बात को नजरंदाज किया जा सकता है कि TET परीक्षा की अधिसूचना 2010 में आई थी। किंतु 2010 से पहले हुई नियुक्तियों को सुरक्षित रखना सरकार का दायित्व है।



छतरपुर शिक्षक संघ ने भी सौंपा ज्ञापन
छतरपुर शिक्षक संघ ने भी कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट के 29 मई 2026 में निर्णय के विरोध में आंदोलन किया गया। शिक्षकों की मूल मांग वर्ष 2010 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को विधायी एवं नीतिगत संरक्षण दिया जाना, ऐसे शिक्षक जिनकी नियुक्ति 2010 से पूर्व हुई है उनको TET से को मुक्त रखा जाना, एवं उन शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति, तथा अन्य लाभों को संरक्षण प्रदान किया जाना थी। साथ ही शिक्षकों ने मांग की है कि संसद में विशेष प्रावधान, विधेयक लाकर शिक्षकों के हितों की सुरक्षा की जाए एवं एवं सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देशित किया जाए कि शिक्षकों में जो असमंजस की स्थिति बनी हुई है । वो खत्म हो। व उनका भविष्य सलामत रह सके।





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