रिपोर्टर रोहन यादव। द ईगल मीडिया
इंदौर में रोड सेफ्टी और तेजी से बढ़ते रोड एक्सीडेंट्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने जोरदार फटकार लगाई।
30 जून को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने हाई लेवल रिव्यू मीटिंग की। जिसमें रिपोर्ट का हवाला देते हुए 5 साल में तेजी से बढ़ रहे सड़क हादसों का ग्राफ बहुत तेजी से बढ़ता दिखा।
समिति द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 – 2025 के बीच, इंदौर में कुल 23,231 सड़क हादसे हुए हैं जिनमें 3,147 लोगों की जान गई और 19 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए ।
बैठक में अधिकारियों द्वारा बीते वर्ष सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुई 287 मौतों की जानकारी दी गई। पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 1 से जून 20 तक, महज छह माह में 2,367 सड़क हादसे हो चुके हैं। जिनमें 287 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। एवं 2,127 लोग घायल हुए हैं। साथ ही 2024 में कुल 66,841 चलन काटे गए। वहीं 2025 में यह संख्या तकरीबन ढाई गुनी बढ़ कर 1,61,511 हो गई। और यदि 2026 की बात करें तो यातायात पुलिस 2,28,284 चालान काट चुकी है।
समिति के अध्यक्ष जस्टिस अभय मनोहर

जब कमेटी के चेयरमैन ने हादसों और मौतों में हो रही इस सालाना बढ़ोतरी की खास वजहों के बारे में पूछा। तो रिव्यू मीटिंग में मौजूद अधिकारी मुख्य कारणों की पहचान करने या इन हादसों के पीछे की वजह के ठोस आँकड़े देने में नाकाम रहे।
पूर्व जस्टिस सप्रे ने हैरानी और नाराज़गी जताते हुए प्रश्न रखा कि पुलिस के रिकॉर्ड तोड़ चालान काटने के बावजूद भी रोड एक्सीडेंट का ग्राफ घट क्यों नहीं रहा है। साथ ही समिति के सदस्यों को आदेश दिए गए कि बीते 5 वर्षों की विश्लेषण व्याख्या के साथ रिपोर्ट तैयार की जाए। जिससे सड़क हादसों की मूल वजह पहचानी जा सके। जस्टिस सप्रे ने फटकार लगते हुए बोल कि सिर्फ जुर्माना वसूलने से काम नहीं चलेगा। हादसों की असल वजह पहचाननी होगी।
जस्टिस सप्रे ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे तुरंत हादसों के कारणों को श्रेणियों (कैटेगरी) में बांटें ताकि प्रोफेशनल एनालिटिकल मॉडलिंग और टारगेटेड स्ट्रक्चरल बदलाव किए जा सकें।
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